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Showing posts from June, 2021

हवन में स्वाहा क्यों बोलते हैं जानिए रहस्य 🔥🔥

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# हवन_में_स्वाहा_क्यों_बोलते_हैं_जानिए_रहस्य ... वास्तव में अग्नि देव की पत्‍नी हैं स्‍वाहा। इसलिए हवन में हर मंत्र के बाद होता है इनका उच्‍चारण। जानिए विस्तार से...   स्वाहा का अर्थ है: सही रीति से पहुंचाना। दूसरे शब्दों में कहें तो जरूरी पदार्थ को उसके प्रिय तक सुरक्षित पहुंचाना। श्रीमद्भागवत तथा शिव पुराण में स्वाहा से संबंधित वर्णन आए हैं।   मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा कहकर ही हवन सामग्री भगवान को अर्पित करते हैं।    हवन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा कहकर ही हवन सामग्री, अर्घ्य या भोग भगवान को अर्पित करते हैं। लेकिन, कभी आपने सोचा है कि हर मंत्र के अंत में बोले जाने वाले शब्द स्वाहा का अर्थ क्या है।     दरअसल कोई भी यज्ञ तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि हवन का ग्रहण देवता न कर लें। लेकिन, देवता ऐसा ग्रहण तभी कर सकते हैं जबकि अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से अर्पण किया जाए। श्रीमद्भागवत तथा शिव पुराण में स्वाहा से संबंधित वर्णन आए हैं। इसके अलावा ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि वैदिक ग्रंथों में अग्नि की महत्ता ...

उच्च न्यालय के वकील के बारे में कैसे पता करें कि वह अच्छा वकील है?

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उच्च न्यालय के वकील के बारे में कैसे पता करें कि वह अच्छा वकील है? मेरे एक क्लांइट थे जो अपने कुछ मुकदमों की पैरवी के लिए वकील करना चाहते थे उस समय मैं भी कुछ मुकदमों में उलझा हुआ था जो मेरे वकील थे वह उस समय वह मुझे काफी काबिल लगते थे ( वो एक अलग विषय है कि कब मैंने उन्हे महालालची व मतलब परस्त पाया) मैंने अपने क्लाइंट को अपने वकील से मिलने का सुझाव दिया । जब मेरे क्लाइंट मेरे वकील को पहली मीटिंग में मिले तो उन्होंने मेरे वकील से सारी बात अपने केस के बारे में बताई और उन्हें अपने केसों के लिए वकील नियुक्त करने के बारे में भी बताया और उन्हें यह भी बताया कि वह मेरे सुझाव से उन के पास आए हैं उन्होंने अपने तौर से जो भी कानूनी दांवपेच की राय उनसे ली और उन्हें अंततः अपना वकील नियुक्त करने का फैसला किया। पर उससे पहले उन्होंने वकील साहब से यह प्रार्थना करी कि यदि आप हमारे जैसे ही किसी अन्य मुकदमे के लिए केस पैरवी कर रहे हैं तो आप हमें अपनी किसी दिन की कोर्ट बहस दिखाएं और बेहतर होगा कि आप एक नहीं बल्कि तीन चार आर्गुमेंट दिखाएँ। क्योंकि हम जब भी किसी वकील को नियुक्त करते हैं हम उसकी क...

UP में 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी रद्द:बोर्ड के 100 साल के इतिहास में पहली बार 26 लाख छात्र प्रमोट होंगे, हाईस्कूल और 11वीं के नंबर के आधार पर तैयार होगा रिजल्ट

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क्या है UPSSSC के PET व OTR फॉर्म में अंतर, ऐसे समझे पूरी बात

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क्या है UPSSSC के PET व OTR फॉर्म में अंतर, ऐसे समझे पूरी बात UPSSSC ने PET और OTR दो तरह के फॉर्मों में आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की है जिसे लेकर यूएसएसएससी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।UPSSSC ने PET और OTR दो तरह के फॉर्मों में आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की है जिसे लेकर यूएसएसएससी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विस्तार वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) में दो तरह के फॉर्म की आवेदन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में कन्फ्यूजन देखा जा रहा है। ऐसे में आज हम इस आर्टिकल के जरिए आपको इस कन्यूजन को दूर करने का प्रयास करेंगे। हाल ही में UPSSSC ने PET और OTR दो तरह के फॉर्मों में आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की है जिसे लेकर यूएसएसएससी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिसे लेकर कई अभ्यर्थी इस बात से परेशान भी हैं। इसलिए आज हम इस आर्टिकल के जरिए पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। क्या है OTR ? उत्तर प्रदेश सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन कमीश...

इजरायल और फिलिस्तीन में युद्ध होने का क्या कारण है ?

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इजरायल और फिलिस्तीन में युद्ध होने का क्या कारण है ? इजरायल और फिलिस्तीन के युद्ध का मुख्य कारण ऊपर की तस्वीर में दिख रही यह मस्जिद है। यह अल अक्सा मस्जिद जेरुसलम में स्थित है। मक्का मदीना के बाद यह मुस्लिमो के लिए सबसे पाक जगह है। यह यहूदी धर्म की सबसे महत्वपूर्ण जगह भी है। इसे ईसाई धर्म के लोग भी बहुत पवित्र मानते है। 1967 से पहले यह जगह जॉर्डन के पास थी परन्तु 1967 में 6 दिन के युद्ध में जब इजरायल ने अरब देशों के गठबंधन को हराया तब इस इलाके पर इजरायल की हुकूमत हो गई। इस युद्ध का एक और मुख्य कारण अरब देशों का इजरायल को देश के रूप में मान्यता नहीं देना भी है। उनके अनुसार इजरायल का कोई अस्तित्व ही नहीं है इसीलिए वो इजरायल पर बार बार आक्रमण करते रहते है पर हर बार मुंह की खा के वापस भाग जाते है। जब वो सीधे युद्ध में इजरायल से नहीं जीत पाए तब उन्होंने आतंकवादी संगठन हमास को खड़ा किया ताकि इजरायल से छद्म युद्ध लड़ा जा सके । भारत के लिए अभी इजरायल सबसे बड़ा मित्र है उसने भारत को कई मौकों पर मदद करके अपनी दोस्ती साबित की है। चाहे वो कारगिल युद्ध हो या फिर अभी कोरोनाव...

क्या खान सर का असली नाम अमित सिंह है?

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क्या खान सर का असली नाम अमित सिंह है? खान सर पटना, पटना, बिहार के 28 वर्षीय यूट्यूबर और शिक्षक हैं। वह खान जीएस रिसर्च सेंटर के नाम से जाने जाने वाले अपने यूट्यूब चैनल पर पढ़ाने के अपने तरीके के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनके 9.2 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं, जो तेजी से बढ़ रहा है। वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उसका धर्म भारतीय है और उसका पेशा टीचिंग है। इसलिए अगर हम आदरणीय खान साहब के छात्र हैं तो हमें उनके असली नाम या उनके व्यक्तिगत विवरण पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमें उनसे अध्ययन करना चाहिए और हमेशा भगवान से उन्हें सुरक्षित रखने की प्रार्थना करनी चाहिए। मैं रॉयल सैनिक चैनल का अनुसरण करता हूं, वह बहुत बुद्धिमान व्यक्ति और सेना के जवान हैं और हमेशा खराब स्थिति में हमारे साथ खड़े रहते हैं, उन्होंने खान सर की भी आलोचना की। मैंने उनके पूरे वीडियो देखा है और मुझे लगता है कि उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है और आप उनके वीडियो देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि उन्होंने कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। वह अच्छी तरह से आलोचना कर रहे हैं जो उनका अधिकार है। अंत में , खान सर का पढ़ाना वास्तव...

कोवीशील्ड और कोवैक्सीन में से कौन सी वैक्सीन लगवानी चाहिये? दोनों में क्या अंतर है ❓

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कोवीशील्ड और कोवैक्सीन में से कौन सी वैक्सीन लगवानी चाहिये? दोनों में क्या अंतर है? कोवीशील्ड oxford University और Astozenca के साथ मिलकर serum institute द्वारा बनाई गई है। इसका उत्पादन और वितरण भारत के साथ साथ कई अन्य देशों में भी हो रहा है। कोवीशील्ड चिंपैंजी एडीनोवायरस वैक्टर (वैक्टर क्या होते हैं, इसपर फिर कभी लिखूँगी) के साथ कोरोना की स्पाईक प्रोटीन को लोड़ करके बनाई गई है। ये स्पाईक प्रोटीन शरीर में जाकर वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। ये वैक्सीन लगभग 70% असरदार है और मोर्टेलिटी रेट को 90% तक कम कर देती है। कोवैक्सीन पूरी तरह भारतीय वैक्सीन है। इसका निर्माण bharat biotech द्वारा किया जा रहा है। ये टीकाकरण की पुरानी पद्धति inactive वायरस को इंजेक्ट करने पर आधारित है (रेबीज -चेचक के टीके भी इसी पद्धति पर आधारित हैं)। ये inactive वायरस शरीर में जाकर बीमार नहीं करता, ये इम्यून सिस्टम को वायरस की पहचान करके बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। ये 75% असरदार और मोर्टेलिटी रेट को 100% कम करता है। साइड इफेक्ट - इंजेक्शन वाली जग...

रिचार्ज प्लान 28 दिनों का ही क्यों होता है?

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रिचार्ज प्लान 28 दिनों का ही क्यों होता है?  आपको पता है कि रिचार्ज प्लान 30 दिनों का ना होकर 28 दिनों का ही क्यों होता है क्योंकि 28 दिनों का रिचार्ज प्लान रखने से कंपनियों को पूरे 1 साल में 1 महीने के रिचार्ज का फायदा होता है। अब आप तो समझ ही गए होंगे कंपनियों की कार्यनीति के बारे में, आइए हम इसे विस्तार से समझते है। हर 28 दिन को एक महीना मानने से एक साल 13 महीने का हो जाएगा। मतलब ग्राहक को 1 साल में 1 महीने का रिचार्ज प्लान अधिक खरीदना होगा। इस तरह टेलीकॉम कंपनी के लिए 28 एक जादुई संख्या है जिसका गणित है इसे ऐसे समझिए 28x13 = 364 . तीन सौ चौसठ की ये संख्या 365 या 366 के बराबर है मतलब एक साल के बराबर। अगर एक साल में हर महीना 28 दिनों का बना दें तो 13 महीनों का एक साल बन जाएगा। अब आप 13 वे महीने का भी रिचार्ज ( Tariff Plans ) करेंगे, मतलब एक साल में 13 रिचार्ज। इसे ऐसे समझिए ... अगर साल के हर महीने से 28 दिन हटा दें तो कैसे एक महीना टेलीकॉम कंपनियों को फायदा होता है। 1 साल में 7 महीने ऐसे होते हैं , जिनमें 31 दिन आते है। इनमें से 28 दिन हर महीने से हटा दें ...