कोवीशील्ड और कोवैक्सीन में से कौन सी वैक्सीन लगवानी चाहिये? दोनों में क्या अंतर है ❓
कोवीशील्ड और कोवैक्सीन में से कौन सी वैक्सीन लगवानी चाहिये? दोनों में क्या अंतर है?
कोवीशील्ड oxford University और Astozenca के साथ मिलकर serum institute द्वारा बनाई गई है। इसका उत्पादन और वितरण भारत के साथ साथ कई अन्य देशों में भी हो रहा है।
कोवीशील्ड चिंपैंजी एडीनोवायरस वैक्टर (वैक्टर क्या होते हैं, इसपर फिर कभी लिखूँगी) के साथ कोरोना की स्पाईक प्रोटीन को लोड़ करके बनाई गई है। ये स्पाईक प्रोटीन शरीर में जाकर वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। ये वैक्सीन लगभग 70% असरदार है और मोर्टेलिटी रेट को 90% तक कम कर देती है।
कोवैक्सीन पूरी तरह भारतीय वैक्सीन है। इसका निर्माण bharat biotech द्वारा किया जा रहा है। ये टीकाकरण की पुरानी पद्धति inactive वायरस को इंजेक्ट करने पर आधारित है (रेबीज -चेचक के टीके भी इसी पद्धति पर आधारित हैं)। ये inactive वायरस शरीर में जाकर बीमार नहीं करता, ये इम्यून सिस्टम को वायरस की पहचान करके बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। ये 75% असरदार और मोर्टेलिटी रेट को 100% कम करता है।
साइड इफेक्ट - इंजेक्शन वाली जगह पर हल्की सूजन, लालिमा और दर्द, हल्का बुखार, सिरदर्द, दस्त, उल्टी , हर व्यक्ति में कम- ज्यादा अलग अलग साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
पर इन साइड इफेक्ट्स से डरने की जरूरत नहीं हैं, बच्चों में भी जो DPT, BCG, hepatitis -B वाले टीके लगते हैं तो ये साइड इफेक्ट उनमें भी नजर आते हैं। ये एक इंडिकेशन होता है कि बॉडी ने वायरस पहचान कर उसके खिलाफ एंडीबॉडी बनाना शुरू कर दिया है।
कोवीशील्ड ज्यादा लोगों को लगी है तो इसकी शिकायत ज्यादा सुनने में आ रही है। पर इसका मतलब ये नहीं कि ये खतरनाक है, यहाँ पर गिनती नहीं Ratio देखना चाहिये।
सबसे जरूरी बात - कोई भी सरकार (किसी भी देश की हो, किसी ही भ्रष्ट क्यों ना हो) अपनी पूरी जनता की जान खतरे में नहीं डालती। दवाईयों और टीकों के मामले में जब तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह संतुष्ट ना हो तब तक आम लोगों पर इस्तेमाल की इजाजत कभी नहीं दी जाती।
कुछ समय पहले तक लोगों को कोवीशील्ड ज्यादा सुरक्षित नजर आ रही थी, लोग कोवैक्सीन के ट्रायल पूरे ना होने की बात कर रहे थे, इसे खतरनाक बोल रहे थे। अब कोवीशील्ड से इंकार करके कोवैक्सीन पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। ऐसी ही बातों से मार्केट में कालाबाजारी और हड़कंप मचता है कृपया ऐसा ना करें। दोनों ही वैक्सीन सुरक्षित हैं, आप उपलब्धता के आधार पर कोई भी लगवा सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग अफवाहें भी फैला रहे हैं कि वैक्सीन लगवाने से लोग मर रहे हैं, कई लोग वैक्सीन लगवाकर आते हैं कुछ लोग भय से हार्ट अटैक में मर जाते हैं और कुछ अन्य समस्याओं से। जब तक ये साबित ना हो कि ये vaccine के कारण हुआ, तब तक ऐसी अफवाहों को फैलाने और मानने से बचें।
अगर आपको मौका मिल रहा है तो वैक्सीन जरूर लगवायें।🙏🙏
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