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WhatsApp पर प्राप्त शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है: हाईकोर्ट

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एक महत्वपूर्ण फैसले में, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि WhatsApp के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है, इसलिए WhatsApp के माध्यम से पुलिस को सूचित करने के बाद सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत शिकायत दर्ज करना धारा 154(1) एवं 154(3) सी.आर.पी.सी. का पर्याप्त अनुपालन है। श्रीनगर विंग में न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी की एकल न्यायाधीश पीठ ने श्रीनगर में सिटी मुंसिफ कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दायर एक शिकायत को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में फैसला सुनाया: “19. रिकॉर्ड   के   अवलोकन   से   पता   चलता   है   कि   शिकायतकर्ता   प्रतिवादी   ने  5.5.2022  को   संबंधित  SHO  पुलिस   स्टेशन   के   समक्ष   एक   शिकायत   अग्रेषित   की   थी ,  जैसा   कि   शिकायतकर्ता   प्रतिवादी   और   शिकायतकर्ता   प्रतिवादी   के   बीच   व्हाट्सएप   चैट   की   तस्वीरों   स...

वकीलों पर लाठीचार्ज मामला: हाईकोर्ट ने पूछा जब निजी, लोक संपत्ति, व्यक्ति को क्षति नहीं पहुंचाई तो किसके आदेश पर वकीलों पर किया लाठीचार्ज ?

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को हापुड़ वकीलों पर लाठीचार्ज के मामले में SIT ने अंतरिम जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की। रिपोर्ट में तथ्य न होने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा- सिर से खून बहते वकील थाने गए। मेडिकल नहीं कराया गया। FIR दर्ज नहीं की। उनके पास हथियार नहीं थे। संपत्ति या व्यक्ति को नुक्सान नहीं पहुंचा रहे थे तो फिर उनपर किसके आदेश से लाठीचार्ज किया गया। इसका रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। कोर्ट ने रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पूछा जांच में कितना समय लगेगा और अगली सुनवाई की तिथि 12 अक्तूबर को पूरी जानकारी देने का आदेश दिया। जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस MC त्रिपाठी की खंडपीठ ने की। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार सण्ड, दूसरी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव,आरके ओझा,अनिल तिवारी अमरेंद्र नाथ सिंह,व बार के महासचिव नितिन शर्मा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने फोनकर जवाब देने की अनुमति दी कोर्ट ने कहा कि SIT ने जांच में कई पहलुओं को छोड़ दिया है। कोर्ट ने पुलिस टीम से पूछे गये सवालों के फोनकर ...

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने CLAT आयोजित करने की पेशकश की, कहा- NLU कंसोर्टियम गैर-वैधानिक निकाय

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को लॉ स्कूलों में एडमिशन के लिए कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (CLAT) आयोजित करने की पेशकश की। शीर्ष वकीलों के निकाय ने कहा कि उसके पास कई क्षेत्रीय भाषाओं में CLAT आयोजित करने की व्यवस्था है, जैसा कि उसने AIBE (अखिल भारतीय बार परीक्षा) के लिए किया था।  एग्जाम वर्तमान में एनएलयू के कंसोर्टियम द्वारा रोटेशनल आधार पर आयोजित की जाती है। बीसीआई ने कहा कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के बीच इस व्यवस्था को कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। इसमें कहा गया कि बीसीआई लॉ एजुकेशन के क्षेत्र में एकमात्र इच्छुक वैधानिक निकाय है, लेकिन उसे उक्त एडमिशन एग्जाम में कोई भूमिका या पर्यवेक्षण नहीं दिया गया। बीसीआई के हलफनामे में कहा गया, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया का प्रस्ताव है कि उसे CLAT आयोजित करने के लिए अपनी लॉ एजुकेश कमेटी के माध्यम से एक्सपर्ट्स का निकाय गठित करने की अनुमति दी जा सकती है, जिसमें लॉ एजुकेश कमेटी काउंसिल में कुछ मौजूदा और पूर्व माननीय न्यायाधीशों, कानूनी शिक्षा के प्रख्यात न्यायविद शिक्षाविदों को शामिल किया जा सकता है।“ यह घटनाक्रम लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर जनहित याचिका प...

दूसरों को दिखाए बिना निजी तौर पर अश्लील वीडियो देखना आईपीसी की धारा 292 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट

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दूसरों को दिखाए बिना निजी तौर पर अश्लील वीडियो देखना आईपीसी की धारा 292 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक व्यक्ति के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, जिसे पुलिस ने अपने मोबाइल फोन पर पोर्न (pornography) देखने के आरोप में सड़क किनारे से गिरफ्तार किया था।  जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा कि निजी तौर पर किसी के फोन पर अश्लील तस्वीरें या वीडियो को डिस्ट्रिब्यूट या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए बिना देखना आईपीसी के तहत अश्लीलता के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा। इसमें कहा गया है कि ऐसी सामग्री देखना किसी व्यक्ति की निजी पसंद है और अदालत उसकी निजता में दखल नहीं दे सकती। बेंच ने कहा,   " इस मामले में निर्णय लेने का प्रश्न यह है कि क्या किसी व्यक्ति के द्वारा दूसरों को दिखाए बिना अपने निजी समय में पोर्न वीडियो देखना अपराध की श्रेणी में आता है? कानून की अदालत यह घोषित नहीं कर सकती कि यह साधारण कारण से अपराध की श्रेणी में आता है। यह उनकी निजी पसंद है और इसमें हस्तक्षेप करना उनकी निजता में दखल के समान है।'' पीठ ने आगे...

यूपी: CM योगी का फोटो जलाने वाले वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज

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गाजियाबाद जिले में पुतले के साथ CM योगी आदित्यनाथ का फोटो जलाने के मामले में 4 वकीलों समेत 5–6 अज्ञात व्यक्तियों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर किया है। बता दें कि मंगलवार को गाजियाबाद कचहरी परिसर में हापुड़ लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों ने 3 पुतले फूंके थे। इसी बीच एक पुतले के ऊपर CM की फोटो रखकर उसे जूतों से कुचला गया और आग के हवाले कर दिया।  जानकारी के अनुसार, कचहरी पुलिस चौकी के प्रभारी महाराज सिंह बघेल ने मुकदमे में अधिवक्ता सुमित देशबंधु, मनोज नागवंशी, रविकांत गौतम और विजय कुमार को नामजद किया है। इन सभी पर IPC सेक्शन 188 (धारा 144 का उल्लंघन), 153A (सद्भाव बिगाड़ना) और 500 (मानहानि करना) लगाए गए हैं। CM योगी का जलाया पूतला सब इंस्पेक्टर की मानें तो बुधवार को कचहरी में अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन चल रहा था। इसमें कुछ अधिवक्ताओं ने राजनीतिक द्वेषभाव के चलते मुख्यमंत्री के फोटो को जलाकर अपमानित किया। इस कृत्य से जनता और विशेष वर्ग में अपार रोष है। Thank you for visit 😊

1 बिस्किट के लिए ITC पर ₹1 लाख का जुर्माना:पैकेट में 16 की जगह निकले 15 बिस्किट, कंज्यूमर कोर्ट ने सुनाया फैसला

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भारत की दिग्गज कंपनी आईटीसी लिमिटेड को एक बिस्किट एक लाख रुपए में पड़ा है। उपभोक्ता फोरम में कई बार ऐसे में मामले सामने आते हैं जो लोगों को हैरान कर देते हैं। एक ऐसा ही मामला चेन्नई का है जहां आईटीसी लिमिटेड पर फोरम ने तगड़ा क्या है पूरा मामला? दरअसल, तमिलनाडु के चेन्नई में एमएमडीए माथुर केपी दिलीबाबू नाम के एक व्यक्ति ने मनाली की एक दुकान से सड़क पर घूम रहे आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए 'सन फीस्ट मैरी लाइट' का एक बिस्किट का पैकेट खरीदा। इस पैकेज में कुल 16 बिस्किट होते है लेकिन इस शख्स को एक बिस्किट कम मिला। शख्स ने इस मामले पर कंपनी से पूछताछ की जहां उसे कोई सही जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम में अपनी शिकायत दर्ज कराई। कंपनी कर रही हर रोज 29 लाख रुपए की धोखाधड़ी दिलीबाबू ने इस मामले पर कंज्यूमर फोरम में अपनी दलील रखते हुए कहा कि आईटीसी कंपनी हर दिन 75 पैसे के बिस्किट अपने पैकेट में कम डालती है। वहीं हर दिन कंपनी द्वारा 50 लाख बिस्किट पैकेट का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में हर दिन कंपनी 29 लाख रुपए के माल की धोखाधड़ी कर रही है। वहीं इस मामले पर कंपनी ने सफाई द...

[कस्टडी] बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक से दूसरे के पास ले जाया जा रहा है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि गोद लिए बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ़ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक माता-पिता से दूसरे माता-पिता के पास ले जाया जा रहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कथित तौर पर दत्तक मां की कस्टडी में रह रहे बच्चे के जैविक माता-पिता को उससे मुलाक़ात करने का अधिकार दिया।  जस्टिस अरुण मोंगा की बेंच ने कहा , "फिलहाल, ऊपर बताए अनुसार अंतरिम व्यवस्था (मुलाकात के अधिकार) को बच्चे के कल्याण में सर्वोपरि रखते हुए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्देशित किया जा रहा है, जहां बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे जबरदस्ती एक से दूसरे के पास ले जाया जा रहा है। इससे वह सिर्फ अदालत के फैसले को लागू करने के लिए रोता-बिलखता रहता है। इस प्रकार यह जरूरी है कि बच्चा वास्तविक सौहार्द बनाकर दोनों परिवारों के साथ भावनात्मक बंधन और मित्रता विकसित करे, जिसके लिए सभी पक्ष आपसी सहयोग करेंगे।” बच्चे की जैविक मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। यह प्रस्तुत किया गया कि जैविक मां, जो बच्चे को गोद लेने वाली मां की भाभी भी है,...