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किसी महिला की इज्जत को छूने की कोशिश से बड़ा कोई अपमान नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने 12 साल की लड़की की अबॉर्शन याचिका स्वीकार की; पिता पर रेप का आरोप

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गुजरात हाईकोर्ट ने 12 साल की एक लड़की की लगभग 27 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की याचिका स्वीकार कर ली। लड़की का बलात्कार करने का आरोप उसके उसके प‌िता के ऊपर है । कोर्ट ने फैसले में कहा, किसी महिला की इज्जत को छूने की कोशिश करने से बड़ा कोई अपमान नहीं है। जस्टिस समीर जे दवे की पीठ ने मामले को दुखद और आश्चर्यजनक माना। उन्होंने फैसले में 'दुर्गा सप्तशती' का उल्लेख करते हुए कहा, "स्त्रिया: समस्ता: सकला जगत्सु [जगत की समस्त स्त्रियां तुम्हारा ही स्वरूप हैं] अर्थात हे देवी जगदम्बे, जगत में जितनी भी स्त्रियां हैं, वह सब तुम्हारी ही मूर्तियां हैं । इसलिए अगर स्त्री चाहे तो वह सब कर सकती हैं जो वह करना चाहती हैं, यह ताकत सिर्फ उसी मे हैं, जो बड़े बड़े संकटों का नाश कर, श्रेष्ठ से श्रेष्ठ और कठिनतम कार्य भी पूर्ण कर सकती हैं । जरुरत हैं तो सर्वशक्तिमान नारी को स्वयं को पहचानने को...।" उसी दिन, अदालत ने वडोदरा स्थित अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़िता की जांच करने और अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने क...

सुनिश्चित करें कि राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को समय पर भुगतान किया जाए, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (04.09.2023) को राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकीलों को देय कानूनी फीस (Legal Fees) की अदायगी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।  सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में राज्य सरकार को वकील की बकाया कानूनी फीस पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया था। जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने ब्याज का भुगतान करने के हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के लिए फीस का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्धारित करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा, “..यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को अपनी फीस की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। राज्य सरकार को स्पष्ट नीति निर्देश जारी करके अपना घर व्यवस्थित करना होगा। इस नीति में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य की ओर से पेश होने वाले वकील को उचित समय के भीतर उ...

आधी रात को पीड़ितों को कॉल करना और उनसे मिलना, विशेषकर यौन उत्पीड़न के पीड़ितों से, उनकी निजता और गरिमा का उल्लंघन है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने लेक पुलिस अधिकारियों की आलोचना की

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक स्वत: संज्ञान मामले में सामूहिक बलात्कार पीड़िता से जुड़े मामले की जांच कर रहे लेक गार्डन और नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों के आचरण पर कड़ी निंदा व्यक्त की। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस गौरांग कंठ की खंडपीठ ने आधी रात को पीड़िता को फोन करने, उससे मिलने जाने और मामले को छोड़ने के लिए उसे प्रभावित करने का प्रयास करने वाले किसी व्यक्ति को जमानत देने के लिए पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई। इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा, "इस अदालत ने कभी ऐसा मामला नहीं देखा, जहां 'जांच' या 'न्याय के हित' के नाम पर अभिसाक्षी हमें यह विश्वास करने के लिए प्रेरित करते हों कि पीड़ितों को, विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के अपराध की महिला पीड़ितों को आधी रात को दस्तक या व्हाट्सएप कॉल किए जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की निजता और सम्मान का अधिकार, विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति का अधिकार सभ्य समाज की आधारशिला है। जांच एजेंसी पीड़ित की निजता के मौलिक अधिकार को संरक्षित, सुरक्षा और गरिमापूर्ण बनाए रखने के लिए बाध्य है। मगर यहां ऐसा प्रतीत होता है कि उसने स्व...

जज सिर्फ एक रिकार्डिंग मशीन नहीं है, उसे ट्रायल में सच्चाई का पता लगाने के लिए चौकन्ना होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को पटना हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया, जिसमें हाईकोर्ट के दृष्टिकोण में कई खामियां पाए जाने के बाद, 10 वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या के अपराध के लिए एक दोषी की मौत की सजा की पुष्टि की गई थी। हाईकोर्ट द्वारा मामले को पुनर्विचार के लिए भेजते समय, सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा के बारे में कड़ी टिप्पणियां कीं। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा लिखा गया था और इसकी शुरुआत हैरी ब्राउन के एक कोट से होती है: "एक निष्पक्ष ट्रायल वह है जिसमें साक्ष्य के नियमों का सम्मान किया जाता है, अभियुक्त के पास सक्षम वकील होता है, और न्यायाधीश उचित अदालत कक्ष प्रक्रियाओं को लागू करता है - एक ऐसा ट्रायल जिसमें हर धारणा को चुनौती दी जा सकती है।" न्यायालय ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 की अनिवार्य शर्त है। इसने स्पष्ट किया: “यदि आपराधिक ट्रायल स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है, तो न्यायाधीश की न्यायिक निष्पक्षता और न्याय वितरण प्रणाली में जनता का विश्वास हिल जाएगा। निष्पक्ष सुनवाई से इनकार करना आरोपी के साथ-साथ पीड़ित और स...

मुजफ्फरनगर छात्र को थप्पड़ मारने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस से जांच के स्टेटस और पीड़ित की सुरक्षा के बारे में पूछा

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 सितंबर) को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के पुलिस अधीक्षक से उस शिक्षक के खिलाफ मामले में जांच की स्थिति के बारे में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, जिस शिक्षक अन्य छात्रों को एक मुस्लिम छात्र को थप्पड़ मारने के लिए कहा था। दो हफ्ते पहले इस घटना का एक वीडियो सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। कोर्ट ने एसपी से अपराध के पीड़ित की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया। इस याचिका में मामले में उचित जांच की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील शादान फरासत ने पीठ को बताया कि याचिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों सहित बच्चों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए स्कूल प्रणालियों के भीतर निवारक और उपचारात्मक उपायों के संबंध में दिशानिर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि शिक्षक की पहचान बाद में तृप्ता त्यागी के रूप में हुई। वीडियो में दिखाई दिया कि टीचर ने बच्च...

बेमेल शादी तलाक का आधार नहीं, जिससे ऐसे जोड़ों को जीवन भर कटु संबंधों के साथ जीना पड़ता हैः दिल्‍ली हाईकोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम में विवाहित जोड़े के बेमेल (incompatibility) होने को तलाक के आधार के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, जिससे ऐसे जोड़ों को "कटु संबंधों" के साथ जीना पड़ता है, जिसमें से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा, "जब तक विपरीत पक्ष की गलती नहीं दिखाई जाती, चाहे वह 'व्यभिचार', 'क्रूरता', 'परित्याग' या अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत निर्दिष्ट अन्य आधार हों, तलाक नहीं दिया जा सकता है। समय के साथ यह पता चला है कि कई बार असंगति और स्वभावगत मतभेदों के कारण विवाह नहीं चल पाते हैं, जिसके लिए किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि, चूंकि केवल दोष सिद्धांत ही प्रचलित है, इसलिए ये पक्ष वर्षों तक एक-दूसरे से केवल इसलिए लड़ते रहते है क्योंकि उनके पास इस रिश्ते से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता है।" पीठ ने कहा कि चूंकि "अपूरणीय विवाह विच्छेद"...

हापुड घटना: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य को वकीलों के खिलाफ 'पुलिस हिंसा' की जांच करने वाली एसआईटी में रिटायर्ड जज को शामिल करने और वकीलों की शिकायतें दर्ज करने का निर्देश दिया

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को हापुड़ में वकीलों पर कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर यूपी में चल रही वकीलों की हड़ताल के बीच यूपी सरकार को घटना की जांच कर रही एसआईटी में एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी को शामिल करने का निर्देश दिया। वकीलों ने दावा किया कि एसआईटी में किसी भी न्यायिक अधिकारी को शामिल न किया जाना इसे "पूरी तरह से एकतरफा" बनाता है। मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी की खंडपीठ ने आदेश दिया, "राज्य सरकार श्री हरि नाथ पांडे, सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, लखनऊ को एसआईटी में एक सदस्य के रूप में शामिल करेगी, जो पहले से ही राज्य सरकार द्वारा संबंधित घटना की जांच के लिए गठित की गई है। इसकी जांच करें और यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट सीलबंद कवर में जमा करें। इसकी एक अंतरिम रिपोर्ट अगली तारीख तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।'' एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा कि एसआईटी में न्यायिक अधिकारी को शामिल करने पर राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। हापुड घटना के संबंध में वकीलों की एफआईआर दर्ज करने और जांच करन...