सुनिश्चित करें कि राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को समय पर भुगतान किया जाए, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (04.09.2023) को राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकीलों को देय कानूनी फीस (Legal Fees) की अदायगी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

 सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में राज्य सरकार को वकील की बकाया कानूनी फीस पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया था।


जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने ब्याज का भुगतान करने के हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के लिए फीस का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्धारित करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा, “..यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को अपनी फीस की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। राज्य सरकार को स्पष्ट नीति निर्देश जारी करके अपना घर व्यवस्थित करना होगा। इस नीति में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य की ओर से पेश होने वाले वकील को उचित समय के भीतर उसकी फीस का भुगतान किया जाए। इस संबंध में राज्य सरकार सुनवाई की अगली तारीख पर या उससे पहले हलफनामा दायर करेगी।


इस मामले में प्रतिवादी वकील ने दिसंबर, 2009 से बकाया बिलों के भुगतान की मांग करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह वकील को बकाया राशि पर देय होने से लेकर भुगतान तक 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी। उस याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रतिवादी को नोटिस जारी किया।


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