पत्नी के पास पति को 'ना' कहने का अधिकार; वैवाहिक बलात्कार अपवाद पितृसत्तात्मक और पुरातनपंथी: जस्टिस दीपक गुप्ता
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने हाल ही में निजता के अधिकार की पृष्ठभूमि में वैवाहिक बलात्कार पर अपने विचार साझा किए। जस्टिस गुप्ता लाइव लॉ की 10वीं वर्षगांठ व्याख्यान श्रृंखला के हिस्से के रूप में "पिछले दशक में मौलिक अधिकारों में विकास" विषय पर एक ऑनलाइन व्याख्यान दे रहे थे। वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे पर जब उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने जवाब दिया, “महिलाओं को ना कहने का अधिकार है। उसे अपने पति को ना कहने का भी अधिकार है। ...सिर्फ इसलिए कि आप पति-पत्नी हैं, पत्नी के पास सेक्स के लिए मना करने का अधिकार नहीं है? जब वह 'नहीं' कहती है तो इसका मतलब 'नहीं' होता है। इससे अधिक कुछ नहीं है। यह बहुत ही सरल तर्क है। बात सिर्फ इतनी है कि हमें अपनी पितृसत्तात्मक और पुरातनपंथी विचारधारा से आगे निकलना होगा। अन्यथा, कुछ भी नहीं है। यह पृथ्वी पर सबसे सरल चीज़ है।” जस्टिस दीपक गुप्ता इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले में जस्टिस मदन बी लोकुर की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्सा थे, जिसमें कहा गया था कि 18 साल से कम उम्र की नाबालिग पत्नी के...