इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला- 'प्रेम-प्रसंग के दौरान बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं' , लेकिन वो 7 हालात जो पहुंचा सकते हैं जेल





Allahabad High Court इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लंबे समय तक चले प्रेम प्रसंग के दौरान बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। भले ही किसी कारणवश शादी से इनकार किया गया हो। कोर्ट ने प्रेमिका से दुष्कर्म करने के आरोपी प्रेमी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही काे रद कर दिया है। पढ़ें पूरा मामला...

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लंबे समय तक चले प्रेम प्रसंग के दौरान बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। भले ही किसी कारणवश शादी से इनकार किया गया हो। कोर्ट ने प्रेमिका से दुष्कर्म करने के आरोपी प्रेमी के खिलाफ निचली अदालत (Lower Court) में चल रही आपराधिक कार्यवाही काे रद कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता (Judge Aneesh Kumar) ने आरोपी जियाउल्ला की याचिका पर दिया है।


युवती ने प्रेमी के खिलाफ दर्ज कराया दुष्कर्म का मामला

संत कबीरनगर (Sant Kabir Nagar) के महिला थाना में एक युवती ने अपने प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म (Misdeed) का मामला दर्ज कराया था। कलमबंद बयान दर्ज कराते हुए पीड़िता ने बताया कि प्रेमी से पहली मुलाकात गोरखपुर (Gorakhpur) में बहन की शादी के दौरान हुई थी।

वर्ष 2008 में हुई थी दोनों की मुलाकात

वर्ष 2008 में शुरू हुई मुलाकात का क्रम आगे भी बना रहा। इससे दोनों के बीच प्रेम हो गया। परिजनों की सहमति से प्रेमी गोरखपुर (Gorakhpur) अक्सर उससे मिलने आता था। इसी दौरान वर्ष 2013 में शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया।

प्रेमिका ने बताया कि उसके परिजनों ने प्रेमी को व्यापार के लिए सऊदी अरब (Saudi Arabia) भी भेजा, जहां से लाैटने के बाद उसने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

कोर्ट ने याची के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र किया रद

वहीं, याची के वकील का कहना था कि शारीरिक संबंध बनाते समय पीड़िता बालिग थी। उसने अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए। शादी से इनकार करने पर दुष्कर्म (Misdeed) का झूठा मुकदमा (Fake Case) दर्ज कराया गया है। इस पर कोर्ट ने याची के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र रद कर दिया।

किस मामले में सुनाया फैसला

आपको बता दें कि संत कबीर नगर के रहने वाले जियाउल्ला के खिलाफ स्थानीय थाने में रेप का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम फैसला सुनाया है।

...........लेकिन वो 7 हालात जो पहुंचा सकते हैं जेल       भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अनुसार,

  1. उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध।

  2. उस स्त्री की सहमति के बिना।

  3. उस स्त्री की सहमति से जबकि उसकी सहमति, उसे या ऐसे किसी व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, को मॄत्यु या चोट के भय में डालकर प्राप्त की गई है।

  4. उस स्त्री की सहमति से, जबकि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस स्त्री का पति नहीं है और उस स्त्री ने सहमति इसलिए दी है कि वह विश्वास करती है कि वह ऐसा पुरुष है। जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है।

  5. उस स्त्री की सहमति के साथ, जब वह ऐसी सहमति देने के समय, किसी कारणवश मन से अस्वस्थ या नशे में हो या उस व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रबन्धित या किसी और के माध्यम से या किसी भी बदतर या हानिकारक पदार्थ के माध्यम से, जिसकी प्रकृति और परिणामों को समझने में वह स्त्री असमर्थ है।

  6. उस स्त्री की सहमति या बिना सहमति के जबकि वह 18 वर्ष से कम आयु की है।

  7. उस स्त्री की सहमति जब वह सहमति व्यक्त करने में असमर्थ है।

स्पष्टीकरण -
इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "योनि" में भगोष्ठ भी होना शामिल होगा।
सहमति का मतलब एक स्पष्ट स्वैच्छिक समझौता होता है- जब महिला शब्द, इशारों या किसी भी प्रकार के मौखिक या गैर-मौखिक संवाद से विशिष्ट यौन कृत्य में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करती है;
बशर्ते एक महिला जो शारीरिक रूप से प्रवेश के लिए विरोध नहीं करती, केवल इस तथ्य के आधार पर यौन गतिविधि के लिए सहमति नहीं माना जाएगा।
एक चिकित्सा प्रक्रिया या हस्तक्षेप बलात्कार संस्थापित नहीं करेगा।
बलात्संग के अपराध के लिए आवश्यक मैथुन संस्थापित करने के लिए प्रवेशन पर्याप्त है ।

अपवाद--पुरुष का अपनी पत्नी के साथ मैथुन बलात्संग नहीं है जबकि पत्नी पन्द्रह वर्ष से कम आयु की नहीं है।

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