फर्न ( Furn)
फर्न एक अपुष्पक पौधा है। इसको जड़, तना, पत्ती तीन-भागों में बाँटा जा सकता है। यह बीजाणुधानियों से बीजाणु उत्पन्न करता है। इसीसे नये पौधों की उत्पत्ति होती है। वे बीजाणुधानियाँ पत्तियों में पाई जाती हैं जो ध्यानपूर्वक देखने पर दिखाई देती हैं।
फर्न्स (Ferns) आम पौधे हैं जिनको लोग घर के अंदर और बाहर हरियाली के लिए लगाते हैं। प्राचीन समय से हजारों किस्म के फर्न्स पाए जाते हैं। वे देखने में सुकुमार और हलके से लेकर घने और झाड़ीदार होते हैं, पर उनकी जरूरतें और उनको देखभाल करने के तरीके एक से हैं।
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फर्न के ये होते हैं फायदे
➥मिट्टी में नाइट्रोजन को रोक कर रखता है इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है
➥ जमीन के अंदर भारी धातुओं को समाप्त करने में है मददगार
➥दिखने में सुंदर और आकर्षक होने की वजह से साड़ी, घरेलू सामान की सजवाट में भी बेहद उपयोगी
➥यूनानी और होम्योपैथी दवाओं में भी होता है इस्तेमाल
➥पर्यावरण संतुलन के लिए फर्न भी जरूरी है। एक शोध में सामने आया कि फर्न जंगलों से गायब हो रहा है जबकि मिट्टी के लिए फायदेमंद है। इसके दवा, सजावटी सामान में भी उपयोग होता है। कैंपा में रानीखेत और नैनीताल में इसकी नर्सरी तैयार की जा रही है।
घर के फर्न्स की देखभाल
✳️सही जगह चुनें:
फर्न्स को छायीं और आस पास धूप की जरूरत होती है। इसलिए आप अपने फर्न को उत्तर की ओर खुलने वाली खिड़की पर रखें। पूर्व और पश्चिम की ओर वाली खिड़कियों में से सीधी धूप आती है जो फर्न्स के लिए अच्छी नहीं है। उत्तर की ओर वाली खिड़की न हो तो आप उसे दक्षिण की ओर वाली खिड़की पर रख सकते हैं। पौधे को खिड़की से दूर रखें ताकि उसमें सीधी धूप न लगे।
✳️फर्न के आस पास नमी रखें-
फर्न्स को नमी बहुत पसंद है। उनके लिए ज्यादा नमी वाली हवा सबसे अच्छी है। आप अपने फर्न्स के लिए दो तरह से ज्यादा नमी बनाये रख सकते हैं : फर्न को दुगुने गमले में लगायें या कमरे में ह्यूमिडीफायर (humidifier) इस्तेमाल करें। दुगुने गमले में लगाने के लिए, जिस गमले में फर्न लगा है उससे थोड़ा बड़ा गमला लें। उसमें पानी से तर-बतर काई भरें। फिर फर्न वाला गमला उसके अंदर रखें। अंदर वाले गमले की मिट्टी और किनारों के ऊपर भी तर-बतर काई डालें और हर दूसरे तीसरे दिन उसे गीला करें ताकि वह नम रहे।
ह्यूमिडीफायर इस्तेमाल कर रहे हों तो उसे फर्न के पास रखें ताकि वह अच्छे से बढ़ सके।
आप अपने फर्न को एक मिस्टिंग बॉटल (misting bottle) और गुन गुने पानी से मिस्ट (mist) (कुहरा डाल सकते हैं) कर सकते हैं। पर यह सिर्फ हर दो चार दिनों बाद करना चाहिए नहीं तो उनमें चित्ते पड़ सकते हैं।
✳️तापमान को समान रखें:
करीब करीब सब किस्म के फर्न ट्रॉपिकल (tropical) होते हैं, पर सबके लिए ट्रॉपिकल मौसम जरुरी नहीं है। अपने घर या जिस कमरे में फर्न लगा है वहाँ का तापमान 70० F (21० C) के करीब रखें। ऐसे फर्न्स 60० F तक के तापमान पर उग सकते हैं, किन्तु नीचे तापमान पर वे अच्छे से नहीं विकसित होंगे। मान लीजिये आपको कोई शंका हो तो तापमान को बढ़ाएं।
आप अपने फर्न को बाथरूम में रख सकते हैं। वहाँ पर नहाने धोने की वजह से नमी और तापमान ज्यादा होता है।
✳️रोज़ पानी डालें:
फर्न्स को नम हवा और नम मिट्टी पसंद है। इसलिए गमले की मिट्टी (potting mix) हमेशा गीली (पर तर-बतर कभी नहीं) रखें। अर्थात उसमें कभी कभी एकदम से बहुत ज्यादा पानी डालने की जगह, आपको रोज़ थोड़ा पानी डालना चाहिए।
✳️महीने में एक बार फर्न्स में उर्वरक डालें:
पास के गार्डनिंग सेंटर में जाकर एक हाउस प्लांट फर्टिलाइज़र (house plant fertilizer) के बारे में पता करें जो खास फर्न्स के लिए बनाया गया हो। जरूरत हो तो किसी परिचारी से सहायता लें। हर महीने इस फर्टिलाइज़र को फर्न पर स्प्रे करें ताकि उसकी मिट्टी में जिन पौष्टिक पदार्थों की कमी है वह पूरी हो जाये। किन्तु आपको उर्वरक डालने का काम फर्न को गमले में लगाने के छह महीने बाद शुरू करना चाहिए।
✳️फर्न के बीमार या मरे हुए हिस्से हटायें:
ज्यादातर घर में लगे हुए फर्न सबल होते हैं और जल्दी बीमार नहीं होते हैं। पर कभी कभी उनमें बीमारी लग जाती है। ऐसे में जो हिस्से खराब हो गए हों उन्हें काटकर हटा दें। यदि लापरवाही की वजह से कोई हिस्सा खत्म होने लगा हो तो उसे भी कैंची से काट दें। मान लीजिये पूरा पौधा बीमार हो गया हो तो दूसरे पौधों में बीमारी फैलने से पहले उस पौधे को निकाल देना अच्छा है।
✳️एक साल या उससे ज्यादा समय के बाद फर्न्स की जगह बदलें (transplant):
समय के साथ बढ़कर, कोई भी फर्न अपने गमले के लिए ज्यादा बड़ा हो जायेगा। कितने समय बाद फर्न की जगह बदलनी है (उसे प्रतिरोपित करना है) यह उसके स्वास्थ्य पर निर्भर करेगा। जल्दी से जल्दी हो सकता है आपको छह महीने बाद उसे पहले गमले से निकालकर बड़े गमले में लगाना पड़े।
✳️फर्न्स को सही जगह पर लगायें:
यदि आपके बगीचे में पहले से फर्न्स लगे हुए हैं तो आपको उनकी जगह नहीं बदलनी पड़ेगी। वे बीमार हो गये हों तो और बात है। फर्न्स को खूब छायीं और नमी अच्छी लगती है। वे बड़े पौधों और पेड़ों की छाया में अच्छे उगते हैं। फर्न्स को किसी ऐसी जगह पर बोयें या प्रतिरोपित करें जहाँ उत्तर की और से धूप आती हो और सीधी धूप न मिलती हो। यदि फर्न्स को सीधी धूप में रखेंगे तो उनकी पत्तियाँ जल जाएँगी।
✳️मिट्टी को नम रखें:
जिस जगह में आप रहते है वहाँ नियमित रूप से वर्षा न होती हो तो फर्न्स में रोज़ पानी डालकर मिट्टी को नम रखें। अपने फर्न्स के ऊपर देवदार की पत्तियों के घासपात (mulch) की करीब 2-3 इंच (5.1-7.6 cm) मोटी परत डालें। इससे मिट्टी की नमी बनी रहेगी और फर्न के पास हवा जरा ज्यादा नम होगी।
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सलाह
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- फर्न के पीछे काले रंग की बिन्दुओं को देखकर चिंतित न हों। वे बीजाणु हैं जिनको सोरी कहते हैं। इनसे फर्न प्रजनन करते हैं।
- एक स्वस्थ फर्न को हर 2 से 3 साल बाद अलग कर सकते हैं।
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